SEBA Class 9 Hindi वैचित्र्यमय असम प्रश्न और उत्तर Vaichitryamay Assam – MIL Solutions | Assam Eduverse
Chapter Overview:
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सारांश
इस अध्याय में असम की विविध जातियों और जनजातियों का परिचय दिया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे कैवर्त, बनिया, हीरा, सूत, हालै, बकलियाल, मेच कछारी, शरणीया कछारी, मदाही और अन्य कई समुदाय एक साथ मिलकर रहते हैं। यह अध्याय इन समुदायों की उत्पत्ति, सामाजिक परंपराओं और व्यवसायों के बारे में जानकारी देता है।
इसके साथ ही, इसमें असम के तीन महान व्यक्तियों – लाचित बरफुकन, सती जयमती और टेंगाई महन के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। लाचित बरफुकन की वीरता, सती जयमती का त्याग और टेंगाई महन का भाषा प्रेम हमें असम के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराता है।
यह अध्याय यह भी बताता है कि असम में बांग्लाभाषी हिंदू, बांग्लाभाषी मुसलमान और भारत के अन्य राज्यों के लोग भी रहते हैं, जो सभी मिलकर एक विविध और एकीकृत असम का निर्माण करते हैं।
संक्षिप्त में उत्तर लिखो
प्रश्न 1. बनिया समुदाय के लोग किस नाम से जाने जाते हैं और वे किस काम से जुड़े हैं?
उत्तर: बनिया समुदाय के लोग मुख्यतः सोनार वैश्य कहलाते हैं और वे सोने का काम करते हैं।
प्रश्न 2. हालै केवट समुदाय को किन तीन नामों से जाना जाता है?
उत्तर: हालै केवट समुदाय को हालै, माली और जालै इन तीन नामों से जाना जाता है।
प्रश्न 3. आहोमों के आने से पहले असम में कौन सी जनजाति रहती थी, जो अब नहीं पाई जाती?
उत्तर: आहोमों के आने से पहले असम में बराही जनजाति रहती थी।
प्रश्न 4. हज्जाम समुदाय के लोगों को निचले असम में किस उपाधि से जाना जाता है?
उत्तर: हज्जाम समुदाय के लोगों को निचले असम में शील उपाधि से जाना जाता है।
प्रश्न 5. केवट समुदाय के लोग हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार किस काम से जुड़े हैं?
उत्तर: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार केवट नाव चलाने और मछली पकड़ने का काम करते हैं।
प्रश्न 6. असम में असमीया सिक्ख किस राजा के अनुरोध पर आए थे?
उत्तर: असमीया सिक्ख स्वर्गदेव चंद्रकांत सिंह के अनुरोध पर पंजाब से असम आए थे।
प्रश्न 7. बांग्लाभाषी हिंदुओं का असम आगमन किस शासनकाल में हुआ था?
उत्तर: बांग्लाभाषी हिंदुओं का असम आगमन अंग्रेजी शासनकाल में हुआ था।
प्रश्न 8. वैश्य समुदाय को कितने भागों में विभाजित किया गया है?
उत्तर: वैश्य समुदाय को साउद वैश्य, सोनारी वैश्य और आर्य वैश्य नामक तीन भागों में विभाजित किया गया है।
प्रश्न 9. रानी सती जयमती ने किस पहाड़ से छलांग लगाकर अपनी जान दी थी?
उत्तर: रानी सती जयमती ने चंदनगिरि पर्वत से छलांग लगाकर अपनी जान दी थी।
प्रश्न 10. मदाही लोग मूल रूप से किस नदी के उस पार बसने वाले किरात कछारी के वंशज हैं?
उत्तर: मदाही लोग मूल रूप से नेपाल की मदाई नदी के उस पार बसने वाले किरात कछारी के वंशज हैं।
विस्तार में उत्तर लिखो
प्रश्न 1. आहोम लोगों का असमिया संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ा? विस्तार से लिखिए।
उत्तर: आहोम लोगों ने 600 से अधिक वर्षों तक असम पर शासन किया और असमिया संस्कृति पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उनकी मूल भाषा ताई थी, लेकिन शासनकाल के दौरान उन्होंने प्रजा की सुविधा के लिए धीरे-धीरे असमिया भाषा को अपना लिया। उनके पंडित आज भी पूजा-पाठ के लिए ताई भाषा का उपयोग करते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है। आहोम लोगों ने स्थापत्य कला में भी योगदान दिया, जैसे तूप वाले और फूल वाले घर। कृषि के क्षेत्र में, उन्होंने शालि धान की खेती, पौध से धान रोपने की पद्धति और खेतों में सिंचाई की व्यवस्था को बढ़ावा दिया। रेशम और बुनाई शिल्प, खासकर मुगा और एंडी रेशम, उनकी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। उन्होंने विभिन्न साग-सब्जी और मछली-मांस के व्यंजन बनाने की स्वादिष्ट परंपरा को भी विकसित किया, जो आज असमिया खान-पान का अभिन्न अंग है।
प्रश्न 2. सराईघाट के युद्ध में लाचित बरफुकन के नेतृत्व और वीरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर: 1671 में हुए सराईघाट के युद्ध में लाचित बरफुकन ने अपनी वीरता और कुशल नेतृत्व का परिचय दिया। मुगलों की विशाल सेना का सामना करने के लिए उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग का रणनीतिक उपयोग किया। उन्होंने सैनिकों में अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए, यहां तक कि अपने कर्तव्य की उपेक्षा करने पर उन्होंने अपने मामा का सिर भी कलम कर दिया, यह कहते हुए कि “देश से बढ़कर मामा बड़ा नहीं होता।” युद्ध के निर्णायक क्षण में जब उनकी तबीयत खराब होने के कारण सैनिक हताश होकर पीछे हटने लगे, तब लाचित अपने बीमार शरीर के बावजूद नाव पर चढ़कर युद्ध के मैदान में उतरे। उनकी इस वीरता को देखकर सैनिकों का मनोबल लौट आया और उन्होंने मुगलों को हरा दिया। इस ऐतिहासिक जीत ने असम की स्वतंत्रता की रक्षा की।
प्रश्न 3. सती जयमती के त्याग और उनके पति राजा गदापानी के प्रति उनके समर्पण का विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर: रानी जयमती का त्याग असम के इतिहास में अमर है। 17वीं शताब्दी में जब मंत्री लालूक सोला के अत्याचारों से बचने के लिए उनके पति गदापानी को छिपना पड़ा, तो जयमती ने उन्हें भाग जाने के लिए राजी किया। लालूक सोला के गुप्तचरों ने उन्हें पकड़ लिया और गदापानी का पता बताने के लिए उन पर बहुत अत्याचार किए। जेरेंगा के निर्जन स्थान पर उन्हें 14 दिनों तक अमानवीय यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने पति का पता नहीं बताया। अंत में 1679 में उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। बाद में जब उनके पुत्र रुद्र सिंह राजा बने, तो उन्होंने अपनी माता की स्मृति में जेरेंगा पठार में जयसागर नामक एक विशाल जलाशय और एक मैदाम (स्मारक) का निर्माण करवाया, जो उनके महान त्याग का प्रतीक है।
प्रश्न 4. टेंगाई महन ने आहोम शब्दकोश ‘बड़काकत हू मूंग पूथी’ की रचना क्यों की और इसका क्या महत्व है?
उत्तर: टेंगाई महन ने 18वीं शताब्दी के अंत में आहोम भाषा का शब्दकोश ‘बड़काकत हू मूंग पूथी’ बनाया। उन्होंने यह काम इसलिए शुरू किया क्योंकि आहोम दरबार में असमिया भाषा का प्रचलन बढ़ने लगा था और उन्हें डर था कि आहोम भाषा धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगी। वे चाहते थे कि भविष्य की पीढ़ी भी अपनी समृद्ध भाषा और संस्कृति को सीख सके। यह शब्दकोश भोजपत्र पर लिखा गया था और इसमें आहोम शब्दों के अर्थ असमिया भाषा में दिए गए थे। यह ग्रंथ आज भी आहोम सभ्यता और इतिहास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है और आहोम भाषा को जीवित रखने का एक सफल प्रयास था।
प्रश्न 5. ‘वैचित्र्यमय असम’ अध्याय में वर्णित सूत, हीरा और हालै समुदायों के बारे में विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
- सूत: जनश्रुति के अनुसार सूत जाति की उत्पत्ति क्षत्रिय पुरुष और ब्राह्मण कन्या के विवाह संबंध से हुई है। महाभारत के समय से ही ये लोग सारथी (रथ चलाने वाले) के रूप में जाने जाते थे। ये प्राचीन काल में ही असम में आ गए थे और धीरे-धीरे असमिया की मुख्यधारा में शामिल हो गए।
- हीरा: हीरा समुदाय के लोग पारंपरिक रूप से मिट्टी के घड़े, दीपक, धूपदानी और अन्य मिट्टी के बर्तन बनाते हैं। ये बर्तन बनाने के लिए चाक का प्रयोग करते हैं। असम में इन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। ऊपरी असम में इस समुदाय का एक हिस्सा सोनार (सुनार) का काम भी करता है।
- हालै: हालै समुदाय केवट लोगों का ही एक हिस्सा है। ‘हालै’ शब्द का अर्थ है ‘हल चलानेवाला’, यानी किसान। ये लोग मुख्यतः कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। हालै समुदाय के लोग वैष्णवी परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं और मृतकों का अंतिम संस्कार चिता जलाकर करते हैं। ये लोग असमियाभाषी मूल असमिया हैं।
प्रश्न 6. असमिया सिक्ख समुदाय की उत्पत्ति कैसे हुई? उनके असम में बसने की कहानी का वर्णन कीजिए।
उत्तर: असमिया सिक्ख समुदाय की उत्पत्ति 1820 ई. में हुए तीसरे मान आक्रमण के समय हुई थी। तत्कालीन राजा स्वर्गदेव चंद्रकांत सिंह ने पंजाब केसरी महाराजा रणजीत सिंह से मदद मांगी। रणजीत सिंह ने 500 सिक्ख सैनिकों को असम भेजा। इन सैनिकों ने मान सेना के खिलाफ वीरता से युद्ध किया, जिसमें से अधिकांश वीरगति को प्राप्त हो गए। जो घायल सैनिक बचे थे, वे सुबेदार राम सिंह के नेतृत्व में ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते कपिली नदी पार कर भेटाइमारा में बस गए। उन्होंने वहां दूसरा गुरुद्वारा स्थापित किया, स्थानीय युवतियों से विवाह किया और यहीं स्थायी रूप से रहने लगे। इस तरह असमिया सिक्ख समुदाय का जन्म हुआ, जो अब असम की संस्कृति का अभिन्न अंग है।
प्रश्न 7. बांग्लाभाषी हिंदुओं और मुसलमानों का असम में आगमन क्यों हुआ और वे असमिया समाज में कैसे शामिल हुए?
उत्तर:
- बांग्लाभाषी हिंदू: अंग्रेजी शासनकाल में रेल कंपनी और चाय बागानों में क्लर्क, मुंशी आदि की नौकरी के लिए बांग्लाभाषी हिंदू असम आए। देश के विभाजन के समय, धार्मिक और राजनीतिक कारणों से बड़ी संख्या में हिंदू शरणार्थी असम आए और यहीं बस गए।
- बांग्लाभाषी मुसलमान: ब्रिटिश शासनकाल में ये लोग खेती-बाड़ी करने के लिए असम आए। 1971 के बांग्लादेश युद्ध के समय बड़ी संख्या में शरणार्थी ब्रह्मपुत्र नदी के उपजाऊ क्षेत्रों में बस गए। ये लोग ढाका, मैमनसिंह, सिलहट जैसे जिलों से आए थे और उन्हें उनके मूल स्थान के नाम पर ‘ढाकिया’, ‘सिलहटिया’ आदि कहा जाता था, जिन्हें आम असमिया समाज में ‘पमुआ’ मुसलमान के रूप में जाना जाता था।
इन समुदायों ने असमिया भाषा और संस्कृति को अपनाते हुए भी अपनी पहचान को कायम रखा है, जिससे असम की सामाजिक विविधता और एकता मजबूत हुई है।
प्रश्न 8. कुमार समुदाय की उत्पत्ति के बारे में प्रचलित जनश्रुति का वर्णन कीजिए और उनके पारंपरिक व्यवसाय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: कुमार समुदाय की उत्पत्ति के बारे में एक जनश्रुति प्रचलित है। उड़ीसा से एक ब्राह्मण परिवार कामाख्या दर्शन के लिए असम आया था। रास्ते में ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। उनकी विधवा पत्नी अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए ब्रह्मपुत्र के उस पार मिट्टी के बर्तन बनाकर बेचने लगी। समय के साथ, उसी परिवार के वंशज कुमार संप्रदाय के रूप में प्रसिद्ध हुए। इस समुदाय का पारंपरिक व्यवसाय मिट्टी के बर्तन बनाना है। वे चाक की मदद से फूल का गमला, मिट्टी का घड़ा, दीपक और अन्य वस्तुएं तैयार करते हैं।
प्रश्न 9. हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार केवटों की पारंपरिक भूमिका क्या है? रामायण में उनके सम्मानजनक स्थान के बारे में लिखिए।
उत्तर: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, केवटों की पारंपरिक भूमिका नाव चलाना और मछली पकड़ना है। रामायण में, एक केवट ने भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को गंगा नदी पार कराई थी। केवट ने भगवान राम के पैर धोने के बाद ही उन्हें अपनी नाव में बैठाया। भगवान राम ने उनकी इस भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें गले लगाया। इस घटना के कारण केवटों को शूद्र वर्ग में होने के बावजूद एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त हुआ।
प्रश्न 10. ‘वैचित्र्यमय असम’ के संदर्भ में, असम को ‘अनेकता में एकता का तीर्थस्थान’ क्यों कहा गया है? समझाकर लिखिए।
उत्तर: ‘वैचित्र्यमय असम’ अध्याय के अनुसार, असम को ‘अनेकता में एकता का तीर्थस्थान’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यहां विभिन्न जातियों, जनजातियों और धर्मों के लोग सदियों से सद्भाव के साथ रहते आए हैं। आहोम, कछारी, गारो, कार्वी और अन्य स्थानीय जनजातियों के साथ-साथ, बांग्लाभाषी हिंदू और मुसलमान, असमीया सिक्ख, राजस्थानी मारवाड़ी और बिहार तथा उत्तर प्रदेश से आए लोग भी असमिया समाज में शामिल हो गए हैं। ये सभी समुदाय अपनी-अपनी भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं को बनाए रखते हुए भी एक बृहत्तर असमिया पहचान का निर्माण करते हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि कैसे इन सभी विविधताओं ने मिलकर असम की संस्कृति को और भी समृद्ध और सुंदर बनाया है, जिससे यह सही मायने में अनेकता में एकता का एक अनूठा उदाहरण बन गया है।
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