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Version -1

वन भ्रमण

वन भ्रमण प्रकृति के सान्निध्य में समय बिताने का एक अत्यंत सुखद और ज्ञानवर्धक अनुभव होता है। जब हम शहरों की भीड़-भाड़, शोरगुल और प्रदूषण से दूर वन की शांत व हरियाली से भरी दुनिया में प्रवेश करते हैं, तो मन को एक विशेष शांति मिलती है। ऊँचे-ऊँचे पेड़, ठंडी हवा, पक्षियों का मधुर कलरव और पत्तों की सरसराहट हमें प्रकृति से जोड़ देती है। वन का वातावरण न केवल आँखों को सुख देता है, बल्कि हमारे मन और आत्मा को भी तरोताजा कर देता है। यही कारण है कि वन भ्रमण को मानसिक शांति का श्रेष्ठ साधन माना जाता है।

वन भ्रमण के दौरान हमें प्रकृति की विविधता को निकट से देखने और समझने का अवसर मिलता है। विभिन्न प्रकार के वृक्ष, औषधीय पौधे, रंग-बिरंगे फूल, नदियाँ, झरने तथा अनेक जीव-जंतु वन की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। इस अनुभव से हमें जैव विविधता का वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। विद्यार्थियों के लिए वन भ्रमण एक जीवंत कक्षा के समान होता है, जहाँ वे पुस्तकों में पढ़ी बातों को प्रत्यक्ष रूप से देख पाते हैं। इससे उनकी जिज्ञासा बढ़ती है और सीखने की रुचि विकसित होती है।

वन हमें जीवन के अनेक महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाते हैं। पेड़-पौधे हमें निःस्वार्थ भाव से ऑक्सीजन, फल, लकड़ी और छाया प्रदान करते हैं। वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं। यदि वनों का विनाश होता रहा, तो पृथ्वी पर जीवन संकट में पड़ जाएगा। इसलिए वन भ्रमण हमें यह समझने में सहायता करता है कि प्रकृति का संरक्षण कितना आवश्यक है।

अतः वन भ्रमण केवल मनोरंजन या यात्रा का साधन नहीं है, बल्कि यह हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाता है। यह हमें पर्यावरण की रक्षा करने, पेड़ लगाने और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने की प्रेरणा देता है। सचमुच, वन भ्रमण मानव जीवन को प्रकृति से जोड़ने का एक सुंदर माध्यम है।


स्वास्थ्य ही धन है

“स्वास्थ्य ही धन है” यह कहावत मानव जीवन का एक महान सत्य प्रस्तुत करती है। यदि किसी व्यक्ति के पास अपार धन-संपत्ति हो लेकिन उसका स्वास्थ्य अच्छा न हो, तो वह जीवन का आनंद नहीं ले सकता। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। अच्छा स्वास्थ्य न केवल व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्षम बनाता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत करता है। इसलिए स्वास्थ्य को जीवन का सबसे बड़ा धन कहा गया है।

स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद अत्यंत आवश्यक है। हरी सब्जियाँ, ताजे फल, दूध, दालें और स्वच्छ जल शरीर को पोषण प्रदान करते हैं। नियमित योग, प्राणायाम और व्यायाम से शरीर स्फूर्तिवान रहता है और रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। इसके साथ-साथ सकारात्मक सोच और मानसिक शांति भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देते हैं। देर रात तक मोबाइल या टीवी देखना, जंक फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी अनेक बीमारियों को जन्म देती है। तनाव, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। जब व्यक्ति बीमार पड़ता है, तब उसे स्वास्थ्य का वास्तविक महत्व समझ में आता है।

इसलिए हमें प्रारंभ से ही अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार, समाज और देश के विकास में योगदान दे सकता है। सही अर्थों में वही व्यक्ति धनवान है जो स्वस्थ है। सच ही कहा गया है—स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है।


देश के प्रति नागरिक कर्तव्य

देश के प्रति नागरिक कर्तव्य प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सामाजिक दायित्व होता है। किसी भी देश की प्रगति उसके नागरिकों के आचरण और कर्तव्य पालन पर निर्भर करती है। जैसे हमें संविधान द्वारा अधिकार प्रदान किए गए हैं, वैसे ही हमारे कुछ कर्तव्य भी निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन करना हमारा दायित्व है। एक अच्छा नागरिक वही होता है जो अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझता और निभाता है।

देश के कानूनों का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हमें सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए और स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। मतदान करना एक महत्वपूर्ण नागरिक कर्तव्य है, क्योंकि इसके माध्यम से हम लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं और सही नेतृत्व का चयन करते हैं।

देश की एकता और अखंडता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। हमें जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित में सोचना चाहिए। समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखना भी नागरिक कर्तव्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवश्यकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिए तत्पर रहना भी सच्चे नागरिक का गुण है।

यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे, तो देश निश्चित रूप से उन्नति के पथ पर आगे बढ़ेगा। एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक ही राष्ट्र को मजबूत और समृद्ध बना सकता है।


अधजल गगरी छलकत जाय

“अधजल गगरी छलकत जाय” एक अत्यंत प्रसिद्ध और अर्थपूर्ण कहावत है। इसका तात्पर्य यह है कि जिन लोगों के पास अधूरा ज्ञान होता है, वे अपने थोड़े-से ज्ञान का घमंड दिखाते हैं, जबकि वास्तव में ज्ञानी व्यक्ति शांत, विनम्र और संयमी होते हैं। यह कहावत मानव स्वभाव और व्यवहार की गहरी सच्चाई को उजागर करती है।

जिस घड़े में पानी कम भरा होता है, वह चलते समय अधिक आवाज करता है और पानी छलकता है, जबकि पूरी तरह भरा घड़ा शांत रहता है। यही स्थिति मनुष्य के ज्ञान के साथ भी होती है। जो व्यक्ति थोड़ा-सा ज्ञान प्राप्त कर लेता है, वह स्वयं को बहुत बड़ा विद्वान समझने लगता है और हर विषय पर अपनी राय देने लगता है। इसके विपरीत, सच्चा ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि ज्ञान का कोई अंत नहीं होता।

आज के समाज में हम अनेक ऐसे लोगों को देखते हैं जो बिना पूरी जानकारी के किसी भी विषय पर बोलने लगते हैं। इससे भ्रम, गलतफहमियाँ और गलत निर्णय उत्पन्न होते हैं। ऐसा व्यवहार न केवल व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि समाज के लिए भी हानिकारक होता है।

यह कहावत हमें सिखाती है कि ज्ञान के साथ विनम्रता और संयम भी आवश्यक है। सच्चा ज्ञान वही है जो व्यक्ति को शांत, समझदार और विवेकशील बनाता है। हमें हमेशा सीखने की भावना रखनी चाहिए और अनावश्यक दिखावे से बचना चाहिए।

Version-2 

वन भ्रमण

वन भ्रमण मानव जीवन को प्रकृति के निकट ले जाने वाला एक अद्भुत अनुभव होता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, शोर और प्रदूषण से थका हुआ मन जब वन की गोद में विश्राम करता है, तो उसे नई ऊर्जा और शांति प्राप्त होती है। चारों ओर फैली हरियाली, स्वच्छ वायु और प्राकृतिक सन्नाटा मन को प्रसन्न कर देता है। वन का वातावरण हमें यह एहसास कराता है कि वास्तविक सुख भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि प्रकृति के सान्निध्य में है।

वन भ्रमण के दौरान हमें प्रकृति की अपार विविधता देखने को मिलती है। ऊँचे वृक्ष, लताएँ, रंगीन पुष्प, बहती नदियाँ और कलरव करते पक्षी वन की शोभा बढ़ाते हैं। विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु हमें पारिस्थितिकी तंत्र की महत्ता समझाते हैं। विद्यार्थियों के लिए वन भ्रमण एक जीवंत शैक्षिक अनुभव होता है, जहाँ वे पुस्तकीय ज्ञान को वास्तविक जीवन से जोड़ पाते हैं।

वन हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देते हैं। पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि वर्षा लाने, जलवायु संतुलन बनाए रखने और मिट्टी को सुरक्षित रखने में भी सहायक होते हैं। वनों की कटाई से प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं, जो मानव जीवन के लिए खतरा बनती जा रही हैं।

इस प्रकार, वन भ्रमण केवल आनंददायक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति से सीखने और उसे बचाने की प्रेरणा भी देता है। यह हमें जिम्मेदार नागरिक बनने और पर्यावरण की रक्षा करने का मार्ग दिखाता है।


स्वास्थ्य ही धन है

“स्वास्थ्य ही धन है” यह उक्ति मानव जीवन की सच्चाई को दर्शाती है। जीवन में सफलता और सुख प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य का अच्छा होना अनिवार्य है। बीमार शरीर के साथ व्यक्ति न तो अपने कर्तव्यों को सही ढंग से निभा सकता है और न ही जीवन का आनंद ले सकता है। स्वस्थ शरीर में ही सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का विकास होता है।

स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए सही जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त विश्राम शरीर को रोगों से बचाते हैं। योग, ध्यान और प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करते हैं। स्वच्छता और अनुशासन भी अच्छे स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण आधार हैं।

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो गए हैं। असंतुलित खानपान, व्यायाम की कमी और तनावपूर्ण जीवनशैली अनेक बीमारियों को जन्म दे रही है। जब स्वास्थ्य बिगड़ता है, तब व्यक्ति को जीवन की वास्तविक प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है।

इसलिए हमें प्रारंभ से ही अपने स्वास्थ्य को महत्व देना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति ही समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकता है। वास्तव में, अच्छा स्वास्थ्य ही सच्चा धन है।


देश के प्रति नागरिक कर्तव्य

देश के प्रति नागरिक कर्तव्य किसी भी राष्ट्र की मजबूती की नींव होते हैं। नागरिकों के कर्तव्य पालन से ही देश में अनुशासन, शांति और प्रगति संभव होती है। अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का संतुलन ही लोकतंत्र को सफल बनाता है।

देश के नियमों का पालन करना, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। मतदान के माध्यम से देश की शासन व्यवस्था में भाग लेना भी नागरिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। स्वच्छता और सामाजिक अनुशासन से ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण होता है।

देश की एकता और अखंडता बनाए रखना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें आपसी भेदभाव को त्यागकर भाईचारे और सद्भावना को बढ़ावा देना चाहिए। देशहित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखना सच्चे नागरिक की पहचान है।

यदि नागरिक अपने कर्तव्यों को निष्ठा से निभाएँ, तो देश उन्नति और विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।


अधजल गगरी छलकत जाय

“अधजल गगरी छलकत जाय” कहावत मानव स्वभाव की एक महत्वपूर्ण सच्चाई को उजागर करती है। इसका अर्थ है कि अधूरा ज्ञान रखने वाले लोग अपने थोड़े-से ज्ञान का दिखावा करते हैं, जबकि वास्तविक विद्वान विनम्र और शांत रहते हैं।

जिस प्रकार आधा भरा घड़ा अधिक आवाज करता है, उसी प्रकार अल्पज्ञानी व्यक्ति अधिक बोलता है। सच्चा ज्ञान व्यक्ति को अहंकार नहीं, बल्कि नम्रता सिखाता है। जो व्यक्ति वास्तव में ज्ञानी होता है, वह अपनी सीमाओं को समझता है।

आज के समय में बिना पूर्ण जानकारी के राय देना आम बात हो गई है। इससे समाज में भ्रम और गलत धारणाएँ फैलती हैं। ज्ञान का सही उपयोग तभी संभव है जब उसमें विवेक और संयम हो।

यह कहावत हमें सिखाती है कि ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता भी आवश्यक है। सच्चा ज्ञान वही है जो व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाता है।

Version-3

वन भ्रमण

वन भ्रमण मनुष्य को प्रकृति के सान्निध्य में ले जाकर उसे जीवन की वास्तविक सुंदरता से परिचित कराता है। आधुनिक युग में मनुष्य मशीनों और कंक्रीट की दुनिया में इतना उलझ गया है कि वह प्रकृति से दूर होता जा रहा है। ऐसे में वन भ्रमण उसे प्राकृतिक वातावरण में कुछ समय बिताने का अवसर देता है, जहाँ शुद्ध वायु, हरियाली और शांत वातावरण मन को सुकून प्रदान करते हैं। वन की गोद में पहुँचकर व्यक्ति अपने दैनिक तनाव और चिंताओं को भूल जाता है।

वन भ्रमण के दौरान हमें प्रकृति के अनेक रूप देखने को मिलते हैं। घने वृक्ष, औषधीय पौधे, रंग-बिरंगे फूल, कलकल करती नदियाँ और तरह-तरह के पशु-पक्षी वन को जीवंत बनाते हैं। यह अनुभव विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होता है, क्योंकि वे पुस्तकों में पढ़े हुए तथ्यों को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ पाते हैं। इससे उनका ज्ञान बढ़ता है और पर्यावरण के प्रति रुचि विकसित होती है।

वन हमें पर्यावरण संतुलन का महत्व भी समझाते हैं। पेड़-पौधे वर्षा लाने में सहायक होते हैं, तापमान को नियंत्रित करते हैं और जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान करते हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण आज प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं, जो मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।

अतः वन भ्रमण केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति को समझने और उसकी रक्षा करने की प्रेरणा भी देता है। यह हमें जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश देता है।


स्वास्थ्य ही धन है

“स्वास्थ्य ही धन है” यह कथन जीवन की एक महत्वपूर्ण सच्चाई को प्रकट करता है। मनुष्य अपने जीवन में धन, पद और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करता है, परंतु यदि उसका स्वास्थ्य अच्छा न हो तो ये सभी उपलब्धियाँ व्यर्थ हो जाती हैं। स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना जीवन सुखद नहीं बन सकता।

स्वस्थ रहने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। पौष्टिक भोजन, समय पर भोजन करना, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद अच्छे स्वास्थ्य की नींव हैं। योग, ध्यान और प्राणायाम न केवल शरीर को मजबूत बनाते हैं, बल्कि मानसिक तनाव को भी दूर करते हैं। स्वच्छता और अनुशासन भी स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आज की आधुनिक जीवनशैली स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। फास्ट फूड, मोबाइल की लत, शारीरिक श्रम की कमी और तनाव ने अनेक रोगों को जन्म दिया है। जब व्यक्ति बीमार पड़ता है, तब उसे यह समझ आता है कि स्वास्थ्य से बढ़कर कोई धन नहीं है।

इसलिए हमें प्रारंभ से ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दे सकता है। वास्तव में, स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।


देश के प्रति नागरिक कर्तव्य

किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों के कर्तव्य पालन पर निर्भर करती है। देश के प्रति नागरिक कर्तव्य वे जिम्मेदारियाँ हैं, जिन्हें निभाकर हम एक अच्छे नागरिक बन सकते हैं। अधिकारों का सही उपयोग तभी संभव है जब हम अपने कर्तव्यों को भी समझें और निभाएँ।

देश के नियमों और कानूनों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हमारी देशभक्ति को दर्शाता है। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, स्वच्छता बनाए रखना और सामाजिक नियमों का पालन करना भी नागरिक कर्तव्य का हिस्सा है। मतदान के माध्यम से देश की शासन व्यवस्था में भाग लेना लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।

देश की एकता और अखंडता बनाए रखना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित में सोचना चाहिए। आपसी सहयोग और भाईचारे से ही राष्ट्र मजबूत बनता है।

यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाए, तो देश विकास और समृद्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।


अधजल गगरी छलकत जाय

“अधजल गगरी छलकत जाय” एक प्रसिद्ध कहावत है, जो मानव स्वभाव की गहरी सच्चाई को प्रकट करती है। इसका अर्थ है कि जिन लोगों के पास अधूरा ज्ञान होता है, वे अपने थोड़े-से ज्ञान का दिखावा करते हैं, जबकि वास्तविक ज्ञानी व्यक्ति सरल और विनम्र होते हैं।

जिस प्रकार आधा भरा हुआ घड़ा चलते समय अधिक आवाज करता है, उसी प्रकार अल्पज्ञानी व्यक्ति हर विषय पर बोलने का प्रयास करता है। उसे अपने सीमित ज्ञान का अहसास नहीं होता। इसके विपरीत, जो व्यक्ति वास्तव में विद्वान होता है, वह जानता है कि ज्ञान का कोई अंत नहीं होता, इसलिए वह संयम और शांति बनाए रखता है।

वर्तमान समाज में बिना पूरी जानकारी के राय देना एक आम प्रवृत्ति बन गई है। इससे गलतफहमियाँ फैलती हैं और कई बार गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। ज्ञान तभी उपयोगी होता है जब उसके साथ विवेक और समझदारी जुड़ी हो।

यह कहावत हमें सिखाती है कि ज्ञान के साथ विनम्रता और धैर्य भी आवश्यक है। सच्चा ज्ञान वही है जो व्यक्ति को बेहतर और जिम्मेदार इंसान बनाता है।

Version-4

वन भ्रमण

वन भ्रमण मनुष्य को प्राकृतिक जीवन से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। आज के यांत्रिक और व्यस्त जीवन में मनुष्य प्रकृति से दूर होता जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव और असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे समय में वन भ्रमण व्यक्ति को शुद्ध वातावरण में सांस लेने, प्रकृति की सुंदरता को महसूस करने और अपने जीवन को नई दृष्टि से देखने का अवसर प्रदान करता है। वन का शांत वातावरण मन को स्थिर करता है और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

वन में हमें प्रकृति की विविधता प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलती है। विशाल वृक्ष, घनी झाड़ियाँ, औषधीय वनस्पतियाँ, बहते जलस्रोत और स्वतंत्र विचरण करते पशु-पक्षी वन को जीवन से भर देते हैं। यह अनुभव विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होता है, क्योंकि वे प्राकृतिक विज्ञान, पर्यावरण और जैव विविधता को प्रत्यक्ष रूप में समझ पाते हैं। इससे उनका ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहता।

वन न केवल सुंदर होते हैं, बल्कि जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक भी हैं। वे वायु को शुद्ध करते हैं, वर्षा को आकर्षित करते हैं और जलवायु संतुलन बनाए रखते हैं। वनों के विनाश से प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हो रही है, जो मानव जीवन के लिए गंभीर चेतावनी है। इसलिए वनों का संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।

इस प्रकार, वन भ्रमण हमें प्रकृति के महत्व का अनुभव कराता है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का बोध कराता है। यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है।


स्वास्थ्य ही धन है

मानव जीवन में स्वास्थ्य का स्थान सर्वोपरि है, इसलिए कहा गया है कि “स्वास्थ्य ही धन है।” जीवन में सभी सुख-सुविधाएँ तभी सार्थक होती हैं जब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। अस्वस्थ व्यक्ति न तो अपने कार्यों को सही ढंग से कर पाता है और न ही जीवन का आनंद ले सकता है। अच्छा स्वास्थ्य जीवन की नींव है।

स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए अनुशासित जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त विश्राम शरीर को स्वस्थ रखते हैं। योग, व्यायाम और ध्यान से न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि मन भी शांत रहता है। सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व हैं।

आधुनिक जीवनशैली ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ा दिया है। अनियमित दिनचर्या, अस्वस्थ खानपान और लगातार बढ़ता तनाव अनेक रोगों का कारण बन रहा है। जब स्वास्थ्य बिगड़ता है, तब व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि धन से बढ़कर स्वास्थ्य का मूल्य है।

इसलिए हमें अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का सही निर्वाह कर सकता है। वास्तव में, स्वास्थ्य ही जीवन का सच्चा धन है।


देश के प्रति नागरिक कर्तव्य

किसी भी देश की मजबूती उसके नागरिकों की जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित होती है। नागरिक कर्तव्य वे नैतिक और सामाजिक दायित्व हैं, जिनके पालन से राष्ट्र का विकास संभव होता है। एक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझता है।

देश के नियमों का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है। स्वच्छता बनाए रखना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और सामाजिक व्यवस्था में सहयोग देना भी नागरिक कर्तव्य के अंतर्गत आता है। मतदान के माध्यम से शासन व्यवस्था में भाग लेना लोकतंत्र की आत्मा है।

देश की एकता और अखंडता बनाए रखना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें सामाजिक और सांस्कृतिक भेदभाव को त्यागकर राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना चाहिए। आपसी भाईचारा और सहयोग से ही राष्ट्र मजबूत बनता है।

यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को निष्ठा से निभाए, तो देश प्रगति और समृद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ेगा।


अधजल गगरी छलकत जाय

“अधजल गगरी छलकत जाय” एक प्रसिद्ध कहावत है, जो मानव स्वभाव की वास्तविकता को सरल शब्दों में व्यक्त करती है। इसका भाव यह है कि जिन लोगों के पास अधूरा या सतही ज्ञान होता है, वे अपने थोड़े-से ज्ञान को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं, जबकि वास्तविक विद्वान सरल और शांत स्वभाव के होते हैं।

जैसे आधा भरा घड़ा चलते समय अधिक छलकता है, वैसे ही अल्पज्ञानी व्यक्ति अनावश्यक रूप से अधिक बोलता है। उसे अपने ज्ञान की सीमाओं का अहसास नहीं होता। इसके विपरीत, सच्चा ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।

आज के समाज में बिना पूर्ण जानकारी के किसी भी विषय पर राय देना आम हो गया है। इससे गलतफहमियाँ फैलती हैं और समाज में भ्रम उत्पन्न होता है। ज्ञान का सही उपयोग तभी संभव है जब उसमें विवेक और विनम्रता हो।

यह कहावत हमें सिखाती है कि सच्चा ज्ञान व्यक्ति को अहंकारी नहीं, बल्कि विनम्र और समझदार बनाता है। हमें हमेशा सीखने की भावना रखनी चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए।

Version-1

प्रश्न 1. बढ़ते हुए प्रदूषण पर चिंता प्रकट करते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारी को एक पत्र लिखिए।

उत्तर

प्रेषक :
रवि कुमार
ग्राम – रामनगर
जिला – सीतापुर

सेवा में,
जिला स्वास्थ्य अधिकारी महोदय
सीतापुर

विषय : बढ़ते हुए प्रदूषण के संबंध में।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों और वृद्धों में सांस की बीमारी, एलर्जी और अन्य रोग तेजी से फैल रहे हैं।

कारखानों से निकलने वाला धुआँ, वाहनों की बढ़ती संख्या और कचरे का सही निस्तारण न होना प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। नदियों और तालाबों में गंदगी फैलने से जल भी दूषित हो रहा है।

आपसे विनम्र निवेदन है कि इस समस्या की ओर ध्यान देकर उचित कदम उठाए जाएँ। प्रदूषण नियंत्रण के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए तथा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

आशा है आप शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

धन्यवाद।
भवदीय
रवि कुमार

Version-2 

प्रेषक :
अमित शर्मा
ग्राम – हरिपुर
जिला – सीतापुर

सेवा में,
जिला स्वास्थ्य अधिकारी महोदय
सीतापुर

विषय : क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के संबंध में।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण के कारण आम जनता का जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से बच्चों, वृद्धों तथा बीमार व्यक्तियों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कारखानों से निकलने वाला धुआँ, खुले में जलाया जाने वाला कचरा तथा बढ़ते वाहन प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त नालियों का गंदा पानी जल स्रोतों में मिलने से जल प्रदूषण भी बढ़ रहा है।

अतः आपसे निवेदन है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ तथा लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाए।

आशा है आप शीघ्र उचित कार्रवाई करेंगे।

धन्यवाद।
भवदीय
अमित शर्मा


Version-3 

प्रेषक :
सुनील वर्मा
मोहल्ला – शांति नगर
जिला – सीतापुर

सेवा में,
जिला स्वास्थ्य अधिकारी महोदय
सीतापुर

विषय : बढ़ते प्रदूषण से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में।

महोदय,
सादर निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ता जा रहा है। दूषित हवा के कारण सांस संबंधी रोग, खाँसी तथा आँखों में जलन जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं।

सड़कों पर वाहनों की अधिक संख्या, औद्योगिक अपशिष्ट और कचरे का अनुचित निस्तारण प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। जल स्रोतों की गंदगी से जल जनित रोग भी फैल रहे हैं।

अतः आपसे अनुरोध है कि प्रदूषण नियंत्रण हेतु ठोस कदम उठाए जाएँ तथा संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएँ।

कृपा कर शीघ्र कार्रवाई करने की कृपा करें।

धन्यवाद।
भवदीय
सुनील वर्मा


Version-4 

प्रेषक :
राहुल सिंह
ग्राम – विकासपुर
जिला – सीतापुर

सेवा में,
जिला स्वास्थ्य अधिकारी महोदय
सीतापुर

विषय : प्रदूषण की बढ़ती समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने हेतु।

महोदय,
निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जन-स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वायु और जल प्रदूषण के कारण अनेक लोग बीमार हो रहे हैं और जीवन-स्तर गिरता जा रहा है।

कारखानों का धुआँ, प्लास्टिक कचरा तथा खुले में बहता गंदा पानी इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएँ तथा लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए।

आशा है आप इस विषय में शीघ्र कदम उठाएँगे।

सधन्यवाद।
भवदीय
राहुल सिंह


Version-1

प्रश्न 2. महँगाई को रोकने के लिए सरकार और जनसाधारण दोनों की जागरूकता की आवश्यकता बताते हुए अपने संपादक को एक पत्र लिखिए।

उत्तर

प्रेषक :
अंकित शर्मा
नगर – लखनऊ

सेवा में,
संपादक महोदय
दैनिक जनवाणी
लखनऊ

विषय : बढ़ती महँगाई पर ध्यान आकर्षित करने हेतु।

महोदय,
आपके प्रतिष्ठित समाचार पत्र के माध्यम से मैं बढ़ती महँगाई की गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। आज आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे आम जनता का जीवन कठिन हो गया है।

महँगाई रोकने के लिए सरकार को ठोस नीतियाँ बनानी चाहिए और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही जनसाधारण को भी जागरूक होकर अनावश्यक वस्तुओं की खरीद से बचना चाहिए।

यदि सरकार और जनता मिलकर प्रयास करें, तो महँगाई पर नियंत्रण पाया जा सकता है। आशा है आप इस विषय को अपने पत्र में प्रमुखता से स्थान देंगे।

धन्यवाद।
भवदीय
अंकित शर्मा

Version-2

प्रेषक :
अंकित शर्मा
नगर – लखनऊ

सेवा में,
संपादक महोदय
दैनिक जनवाणी
लखनऊ

विषय : बढ़ती महँगाई पर ध्यान आकर्षित करने हेतु।

महोदय,

आपके सम्मानित समाचार पत्र के माध्यम से मैं देश में बढ़ती महँगाई की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। आज खाद्य पदार्थों, ईंधन तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग अत्यधिक प्रभावित हो रहा है।

महँगाई पर रोक लगाने के लिए सरकार को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही आम नागरिकों को भी समझदारी दिखाते हुए फिजूलखर्ची से बचना चाहिए।

यदि सरकार और जनता मिलकर प्रयास करें, तो निश्चित रूप से महँगाई पर काबू पाया जा सकता है। आशा है आप इस विषय को अपने पत्र में स्थान देकर जन-जागरूकता बढ़ाएँगे।

धन्यवाद।
भवदीय
अंकित शर्मा

Version-3

प्रेषक :
अंकित शर्मा
नगर – लखनऊ

सेवा में,
संपादक महोदय
दैनिक जनवाणी
लखनऊ

विषय : बढ़ती महँगाई पर ध्यान आकर्षित करने हेतु।

महोदय,

आज देश की आम जनता बढ़ती महँगाई से बुरी तरह परेशान है। रोज़मर्रा की वस्तुएँ आम आदमी की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए जीवन यापन कठिन होता जा रहा है।

महँगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे तथा आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही जनता को भी जागरूक होकर अनावश्यक खरीदारी से बचना चाहिए और संसाधनों का सही उपयोग करना चाहिए।

जब सरकार और नागरिक दोनों अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तभी इस समस्या का समाधान संभव है। आशा है आप इस जनहित के विषय को अपने पत्र में प्रमुखता देंगे।

धन्यवाद।
भवदीय
अंकित शर्मा

Version-4 

प्रेषक :
अंकित शर्मा
नगर – लखनऊ

सेवा में,
संपादक महोदय
दैनिक जनवाणी
लखनऊ

विषय : बढ़ती महँगाई पर ध्यान आकर्षित करने हेतु।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि वर्तमान समय में महँगाई देश की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक बन चुकी है। आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता का जीवन यापन अत्यंत कठिन हो गया है।

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को प्रभावी आर्थिक नीतियाँ लागू करनी चाहिए तथा भ्रष्टाचार और कालाबाजारी पर पूर्णतः अंकुश लगाना चाहिए। साथ ही जनसाधारण को भी संयम बरतते हुए केवल आवश्यक वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए।

सरकार और जनता के संयुक्त प्रयास से ही महँगाई जैसी समस्या पर नियंत्रण संभव है। आशा है आपका पत्र इस विषय पर समाज को जागरूक करने में सहायक सिद्ध होगा।

धन्यवाद।
भवदीय
अंकित शर्मा


Version-1

प्रश्न 3. आप विद्यालय में स्थित विद्यार्थी परिषद के सचिव हैं। विद्यालय में “विज्ञान : वरदान या अभिशाप” विषय पर होने वाली वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को आमंत्रित करते हुए सूचना लिखिए।

उत्तर 

सूचना

सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में दिनांक 20 फरवरी 2026 को
“विज्ञान : वरदान या अभिशाप”
विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।

इस प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। इच्छुक विद्यार्थी अपना नाम दिनांक 18 फरवरी तक विद्यार्थी परिषद कार्यालय में दर्ज कराएँ।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएँगे।

अधिक जानकारी के लिए विद्यार्थी परिषद से संपर्क करें।

सचिव
विद्यार्थी परिषद

Version-2 

सूचना

विद्यालय के सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में दिनांक 20 फरवरी 2026 को
“विज्ञान : वरदान या अभिशाप”
विषय पर एक वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।

इस प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। इच्छुक विद्यार्थी अपना नाम 18 फरवरी 2026 तक विद्यार्थी परिषद कक्ष में दर्ज कराएँ।

प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएँगे।

सचिव
विद्यार्थी परिषद


Version-3 

सूचना

सभी विद्यार्थियों को यह जानकर प्रसन्नता होगी कि विद्यालय में 20 फरवरी 2026 को
“विज्ञान : वरदान या अभिशाप”
विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।

प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी 18 फरवरी तक अपना पंजीकरण विद्यार्थी परिषद के पास करवा सकते हैं।

यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों की तार्किक एवं वाक्-कौशल क्षमता को निखारने का एक सुनहरा अवसर है।

सचिव
विद्यार्थी परिषद


Version-4 

सूचना

विद्यालय के समस्त विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि विद्यार्थी परिषद द्वारा दिनांक 20 फरवरी 2026 को
“विज्ञान : वरदान या अभिशाप”
विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

इस प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थी भाग लेने के पात्र होंगे। इच्छुक विद्यार्थी 18 फरवरी 2026 तक अपना नामांकन विद्यार्थी परिषद कार्यालय में कराएँ।

प्रतियोगिता में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

सचिव
विद्यार्थी परिषद


Version-1

प्रश्न 4 – व्यायाम के अनेक लाभ बताते हुए अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए।

उत्तर

प्रिय छोटे भाई रोहन,
सप्रेम नमस्ते।

आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मैं तुम्हें इस पत्र के माध्यम से व्यायाम के महत्व के बारे में बताना चाहता हूँ। व्यायाम हमारे शरीर को स्वस्थ, मजबूत और फुर्तीला बनाता है। इससे हमारा पाचन ठीक रहता है और हम बीमारियों से बचे रहते हैं।

नियमित व्यायाम करने से मन भी प्रसन्न रहता है और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है। सुबह की सैर, योग और खेल-कूद शरीर के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। आजकल मोबाइल और टीवी के कारण बच्चे कम सक्रिय हो गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

मैं चाहता हूँ कि तुम प्रतिदिन थोड़ा समय व्यायाम के लिए निकालो और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाओ। इससे तुम लंबे समय तक स्वस्थ रहोगे।

माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा भाई
अमित

Version-2

प्रिय छोटे भाई रोहन,
सप्रेम नमस्ते।

आशा है तुम कुशलपूर्वक होगे। मैं इस पत्र के माध्यम से तुम्हें व्यायाम के लाभों के बारे में बताना चाहता हूँ। व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ, तंदुरुस्त और शक्तिशाली बनता है। इससे रक्तसंचार ठीक रहता है और हम अनेक रोगों से बचे रहते हैं।

नियमित व्यायाम करने से मन प्रसन्न रहता है तथा आलस्य दूर होता है। पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में भी सहायता मिलती है। योग, दौड़ना और खेल-कूद जैसे व्यायाम हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं।

अतः मैं तुम्हें सलाह देता हूँ कि प्रतिदिन कुछ समय व्यायाम के लिए अवश्य निकालो। इससे तुम्हारा भविष्य स्वस्थ और उज्ज्वल बनेगा।

माता-पिता को मेरा प्रणाम।
तुम्हारा भाई
अमित


Version-3

प्रिय रोहन,
स्नेहपूर्ण नमस्ते।

आशा है तुम अच्छे स्वास्थ्य में होगे। आज मैं तुम्हें व्यायाम के महत्व के बारे में बताना चाहता हूँ। व्यायाम से शरीर मजबूत बनता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जो व्यक्ति नियमित व्यायाम करता है, वह कम बीमार पड़ता है।

व्यायाम से मानसिक तनाव भी कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। सुबह की सैर और योगासन अपनाने से दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है। आज के समय में मोबाइल और टीवी से दूर रहकर व्यायाम करना बहुत आवश्यक हो गया है।

इसलिए तुम रोज़ थोड़ा समय निकालकर व्यायाम करने की आदत डालो। यह आदत जीवनभर तुम्हारे काम आएगी।

घर में सबको मेरा स्नेह।
तुम्हारा भाई
अमित


Version-4

प्रिय छोटे भाई रोहन,
सप्रेम नमस्कार।

आशा है तुम स्वस्थ होगे। मैं इस पत्र द्वारा तुम्हें यह बताना चाहता हूँ कि व्यायाम हमारे जीवन में कितना आवश्यक है। व्यायाम से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है और कार्य करने की क्षमता बढ़ती है।

नियमित व्यायाम करने से मोटापा दूर होता है और मन शांत रहता है। इससे याददाश्त तेज होती है और पढ़ाई में मन लगता है। खेल-कूद और योग व्यायाम के उत्तम साधन हैं।

अतः तुम प्रतिदिन व्यायाम करने का संकल्प लो और स्वस्थ जीवन अपनाओ। मुझे विश्वास है कि तुम मेरी बात अवश्य मानोगे।

माता-पिता को प्रणाम।
तुम्हारा भाई
अमित

Zubeen Garg: The Maverick Voice of Northeast India 

Zubeen Garg stands as one of the most influential, versatile, and emotionally resonant musical icons to emerge from Northeast India. With a career spanning nearly three decades, he has shaped the soundscape of Assamese music while expanding his reach to Bengali, Hindi, Nepali, and several other regional industries. More than just a singer, he is a composer, actor, filmmaker, and cultural force whose work often reflects the aspirations and struggles of the people of Assam. His art, charisma, and fearless individuality have earned him an unmatched place in the hearts of millions.

Early Life and Musical Roots

Born on 18 November 1972 in Tura, Meghalaya, and raised in Assam, Zubeen Garg was introduced to music before he could walk steadily. His family environment nurtured artistic expression: his mother, the late Ily Borthakur, was a well-known Assamese singer, and his father, the late Mohini Mohan Borthakur, was a lyricist writing under the pen name Kapil Thakur. Surrounded by melodies, instruments, and the creative energy of his parents, Zubeen absorbed musical knowledge effortlessly.

Named after the legendary singer Zubin Mehta, he grew up with a sense of artistic destiny. He learned tabla, guitar, keyboard, and dhol, which later helped him develop a distinctive musical personality. His early performances in school and local events revealed an artist unafraid to experiment and express himself passionately.

Rise to Fame in Assamese Music

Zubeen Garg’s ascent in the Assamese music industry was swift and transformative. His first major breakthrough came with the 1992 album “Anamika”, a collection of modern Assamese songs that struck listeners with its freshness. The album not only showcased his emotive voice but also revealed his flair for composition and innovative arrangement. With Anamika, Zubeen marked the emergence of a new youthful sound in Assamese contemporary music.

Following this success, he continued releasing albums that redefined Assamese pop and modern music. Songs like “Mayabini,” “Nuronir Chaku,” “Pakhi,” and “Maya” became huge hits. For many Assamese youth growing up in the 1990s and early 2000s, Zubeen’s voice became inseparable from their memories of school, college, and young romance.

He blended Western influences with Assamese melodies, integrated experimental rhythms, and infused emotional intensity rarely seen before. This made him not only a star but a trendsetter, inspiring an entire generation of musicians.

National Recognition and the Bollywood Breakthrough

Although Zubeen had already earned massive fame in the Northeast, national recognition came with his Bollywood playback career. His most iconic Bollywood song, “Ya Ali” from the film Gangster (2006), became a nationwide sensation. The song topped charts across India, earned him multiple awards, and introduced millions to his extraordinary vocal depth.

“Ya Ali” was more than a hit—it was a cultural moment. Zubeen’s raw, passionate style stood out in the Bollywood music landscape dominated by smoother, more conventional voices. His delivery brought a heartfelt, almost haunting dimension to the song, helping it endure as a classic even today.

Beyond “Ya Ali,” Zubeen contributed to other Hindi films and worked with prominent industry composers. But his heart remained in regional music, which allowed him greater creative freedom.

A Prolific Multilingual Artist

One of Zubeen Garg’s most remarkable qualities is his linguistic versatility. He has recorded songs in over a dozen languages, including Assamese, Bengali, Hindi, Nepali, Marathi, Tamil, Telugu, Manipuri, and Bodo. Few Indian musicians match the breadth of his catalog.

His Bengali discography, in particular, is extensive. Collaborating with major Bengali composers, he produced hit albums and playback songs that expanded his fanbase enormously. In both Assamese and Bengali music industries, he enjoys a cult-like following, often regarded as a cultural ambassador of the Northeast.

Beyond Singing: Composer, Actor, Filmmaker

Zubeen is not content with merely lending his voice; his creative curiosity extends to composing, producing, and acting. He has composed music for numerous Assamese films and albums, often blending folk traditions like Bihu and Tokari with modern instrumentation.

His venture into acting began with the Assamese film “Tumi Mur Mathu Mur”, followed by roles in several other films. His most ambitious cinematic project is “Mission China” (2017), which he directed, scored, and starred in. The film became a historic blockbuster in Assamese cinema, demonstrating his ability to elevate the region’s film industry with high production values and compelling storytelling.

Later, he continued producing and contributing to films like “Kanchanjangha,” “Pratighaat,” and others, shaping a more dynamic Assamese film industry that increasingly finds national attention.

The Rebel, the Romantic, the Voice of the People

A defining aspect of Zubeen Garg’s personality is his rebellious, outspoken nature. He has frequently taken public stances on social, political, and cultural issues in Assam. Whether advocating for indigenous identity, environmental protection, or the rights of young artists, Zubeen often positions himself as an activist-artist.

At times, his outspoken behavior has sparked controversy, but his fans see it as an extension of his authenticity. For many Assamese people, Zubeen is not merely a singer—they perceive him as a voice representing their hurts, dreams, frustrations, and aspirations.

His humanitarian spirit is another lesser-known but deeply meaningful dimension. He participates in charity concerts, supports emerging artists financially, and lends his influence to local causes. This aspect of his work has strengthened his relationship with fans and the cultural community.

Artistic Evolution and Enduring Legacy

Zubeen Garg’s musical journey shows remarkable evolution. In early years, his work was energetic and youth-driven; over time, it matured into more thoughtful compositions reflecting personal and social depth. Even after thousands of songs, he continues to innovate—experimenting with folk fusion, unplugged arrangements, and indie styles that speak to newer generations.

His legacy is monumental. In Assam, he is a phenomenon comparable to iconic regional artists across India. He brought Assamese music into mainstream Indian awareness and inspired countless young musicians to pursue artistic careers. His concerts often feel like cultural festivals, uniting diverse communities and age groups.

An Artist Who Belongs to the People

Zubeen Garg’s enduring popularity stems from more than musical talent. It comes from his refusal to conform, his ability to remain emotionally accessible, and his belief that music is a bridge between people. Fans feel a personal connection with him—one that transcends fame.

He blends vulnerability with confidence, modernity with tradition, and artistry with activism. These qualities make him not just a musician but a symbol: of freedom, of creativity, and of Northeast India’s vibrant cultural identity.

Conclusion

Zubeen Garg’s life and career reflect the spirit of a true artist—restless, passionate, and constantly evolving. From his humble beginnings in Assam to becoming one of the most influential voices of the Northeast and a recognized figure nationwide, he has shaped contemporary music and cinema with innovation and heart.

In every song he sings, whether a soulful melody or an electrifying live performance, Zubeen offers a piece of himself. His story is not just about fame—it is about dedication, authenticity, and the power of music to transform cultures and connect hearts. As his journey continues, Zubeen Garg remains a beacon of artistic brilliance and an irreplaceable icon of the Assamese identity.

 

1. वर्तमान ही सबसे बड़ा उपहार 

हम अक्सर या तो बीते हुए कल  की बातों में उलझे रहते हैं या आने वाले कल  की चिंता करते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हमारा सबसे महत्वपूर्ण समय ‘वर्तमान’  है। जो समय हमारे हाथ में है, वह आज और अभी है। भूतकाल को बदला नहीं जा सकता और भविष्य को कोई नहीं जानता। इसलिए, हमें अपनी पूरी शक्ति और ध्यान अपने वर्तमान पर लगाना चाहिए। अगर हमारा आज अच्छा होगा, तो हमारा भविष्य अपने आप बेहतर बन जाएगा। हमें हर काम को पूरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए, ताकि हमें बाद में पछतावा न हो। वर्तमान में जीना ही समय का सबसे अच्छा उपयोग है।

वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने से हमारा मन शांत रहता है और हम अनावश्यक तनाव से बचते हैं। जब हम अपना पूरा ध्यान सिर्फ़ उस काम पर लगाते हैं जो हम अभी कर रहे हैं, तो हमारी कार्यक्षमता बढ़ जाती है और गलतियाँ कम होती हैं। भविष्य की चिंता में लगे रहने से हमारा ‘आज’ का समय बर्बाद होता है। इसलिए, हमें हर पल को एक मौक़ा मानकर पूरी एकाग्रता से काम करना चाहिए, क्योंकि यह वर्तमान का पल ही हमारी सफलता की नींव रखता है।

2. समय का संतुलन और उत्तम स्वास्थ्य 

समय का सही उपयोग केवल पढ़ाई या काम करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य  से भी जुड़ा है। अगर हम समय पर सोते हैं, समय पर भोजन करते हैं और रोज़ाना खेलने या व्यायाम  के लिए समय निकालते हैं, तो हम स्वस्थ रहते हैं। अनियमित दिनचर्या अपनाने से हमारा शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं और हम बीमार पड़ सकते हैं। एक संतुलित समय सारणी हमें यह सिखाती है कि पढ़ाई के साथ-साथ आराम और मनोरंजन भी ज़रूरी है। जो व्यक्ति समय को संतुलित रखता है, वह हमेशा ऊर्जावान रहता है और अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है। अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है, और यह समय के अनुशासन से आता है।

इस संतुलन को बनाए रखने के लिए, हमें जानबूझकर अपने लिए ‘मी टाइम’ या व्यक्तिगत समय निर्धारित करना चाहिए। यह समय केवल हमारे शौक, रचनात्मकता या मानसिक शांति के लिए होना चाहिए। जब हम खुद को पर्याप्त आराम और मनोरंजन का समय देते हैं, तो हमारा दिमाग फिर से तरोताज़ा हो जाता है और हम पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इस तरह, समय का संतुलन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है और हमें बर्नआउट (burnout) से बचाता है।

3. एक सेकंड का मूल्य 

हम अक्सर सेकंड, मिनट या छोटे समय को बेकार मान लेते हैं, लेकिन जीवन में कई बार एक सेकंड भी बहुत मूल्यवान साबित होता है। एक दौड़ जीतने या हारने का फ़ैसला अक्सर एक सेकंड के दसवें हिस्से में होता है। विज्ञान के क्षेत्र में एक पल का समय किसी बड़े आविष्कार का आधार बन सकता है। यहाँ तक कि रोज़मर्रा के जीवन में भी, स्कूल की बस पकड़ने के लिए एक मिनट की देरी हमें पूरा दिन परेशान कर सकती है। हमें इस बात को समझना चाहिए कि बड़े-बड़े काम छोटे-छोटे पलों को जोड़ने से बनते हैं। इसलिए, हमें कभी भी किसी छोटे पल को व्यर्थ नहीं समझना चाहिए और हर सेकंड का सही इस्तेमाल करना सीखना चाहिए।

छोटे समय के इन हिस्सों का उपयोग करने को ही ‘छोटे समय का प्रबंधन’ कहते हैं। उदाहरण के लिए, बस का इंतज़ार करते समय या स्कूल के ब्रेक के दौरान, हम किसी विषय की एक छोटी परिभाषा याद कर सकते हैं या पिछले पाठ की समीक्षा  कर सकते हैं। ये छोटे-छोटे प्रयास मिलकर हमारी तैयारी को मज़बूत बनाते हैं। इस तरह, कोई भी समय बेकार नहीं होता; हर पल का उपयोग किया जा सकता है, जो अंततः बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करता है।

4. महान व्यक्तियों का समय बोध 

इतिहास उठाकर देखें तो जितने भी महान वैज्ञानिक, नेता या कलाकार हुए हैं, उन सभी ने समय के महत्व को समझा। महात्मा गांधी जी हों, या अब्दुल कलाम जी, सभी ने अपने जीवन का एक मिनट भी बर्बाद नहीं किया। वे जानते थे कि समय सीमित है, और उन्हें इसी सीमित समय में दुनिया के लिए कुछ बड़ा करना है। सफल लोग कभी भी ‘फुर्सत’ की तलाश में नहीं रहते, बल्कि वे अपने खाली समय को भी कुछ सीखने या बनाने में लगाते हैं। महान व्यक्तियों का जीवन हमें सिखाता है कि समय का सही प्रबंधन ही उन्हें साधारण से असाधारण बनाता है। हमें भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर, अपने समय को गंभीरता से लेना चाहिए।

महान व्यक्तियों का समय के प्रति यह समर्पण उन्हें बहुमुखी  बनने में भी मदद करता था। वे जानते थे कि उन्हें अपने मुख्य उद्देश्य के साथ-साथ समाज और परिवार के लिए भी समय निकालना है, और यह केवल सख्त समय-सारणी के कारण ही संभव हो पाता था। समय के प्रति उनकी यह ईमानदारी ही उन्हें एक स्थायी विरासत छोड़ने की अनुमति देती है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी सीख सकें। हमें समझना चाहिए कि हमारा वर्तमान समय ही वह चीज़ है जो भविष्य में हमारा इतिहास बनेगा।

Question: “Create a short story in 200–250 words with the help of the clues given below. Give a suitable title to the story.
Clues: Going to Mumbai by train to attend the marriage of a friend — Got stuck in a traffic jam — Boarded the wrong train — Realised it after two hours.”
Answer:
A Wrong Turn in the Tracks

Sunil eagerly boarded the Mumbai Express, clutching a hastily wrapped wedding gift. His best friend’s marriage was tomorrow, and he had precisely 25 hours to cross 1,400 kilometers. He settled into his reserved seat, the rhythm of the train quickly lulling him to sleep.

When he woke, the compartment was eerily quiet. He checked his phone: 8 AM. He peered out the window, expecting the familiar shantytowns of the Mumbai suburbs. Instead, he saw endless, arid fields and a lone sign in an unfamiliar script: “Welcome to Nashik.”

A cold dread washed over him. He rushed to the door, finding the bewildered Ticket Collector. “Sir, this is the wrong train,” the TC sighed. “The Express was delayed. This is the Nashik Mail. You must have boarded when the tracks were switched due to the freight traffic jam around 4 AM.”

Sunil checked his watch: he had been on the wrong train for over two hours. His journey to Mumbai, which had already started late, was now in shambles. He detrained at the next stop, a dusty, desolate station. Frantically, he called a taxi, his meticulously planned schedule dissolving into dust. The friend, the wedding, the gift—everything depended on him outsmarting a colossal railway blunder.

All Math Questions (Factorisation, Simplification, LCM & HCF)

Factorisation Questions (Competitive Level)

1. \( x^2 - 11x + 30 \)

2. \( 4a^2 - 9b^2 \)

3. \( 12x^2 + 11x - 15 \)

4. \( 3y^3 - 12y \)

5. \( 2m^3 + 7m^2 - 9m \)

6. \( 9p^2 + 6p + 1 \)

7. \( x^3 - 4x^2 + 3x \)

8. \( 25a^2b^2 - 40ab^3 + 16b^4 \)

9. \( 15x^2 - 14xy - 3y^2 \)

10. \( 2x^4 - 18x^2 \)

Simplification Questions (Assam SI Level)

11. \( \frac{45 \times 12}{15 \times 6} \)

12. \( (32 \div 2^3) \times 5 \)

13. \( \frac{3}{4} + \frac{5}{8} - \frac{7}{16} \)

14. \( \sqrt{784} + 12 \div 3 \)

15. \( 125^{\frac{2}{3}} \div 5 \)

16. \( \frac{1}{0.25} + 0.16 \div 0.04 \)

17. \( 18\% \text{ of } 250 + 32\% \text{ of } 50 \)

18. \( (54 \div 9)(8 - 3)^2 \)

19. \( \frac{2.4 \times 0.5}{0.06} \)

20. \( \left(\frac{7}{9}\right)^{-1} + \left(\frac{3}{5}\right)^{-1} \)

21. \( \frac{96 \div 4}{3 \div 0.5} \)

22. \( \sqrt{1296} - 5^2 \)

23. \( 0.75 \times 0.16 \div 0.04 \)

24. \( \frac{5}{6} + \frac{7}{12} - \frac{1}{4} \)

25. \( (3.2 + 4.8) \div 0.2 \)

26. \( 225^{1/2} + 27^{1/3} \)

27. \( 14\% \text{ of } 450 - 8\% \text{ of } 200 \)

28. \( (81 \div 9)^2 + 6 \times 4 \)

29. \( \frac{0.9 \times 0.3}{0.09} \)

30. \( 2^{-3} + 4^{-1} + 8^{-1} \)

LCM & HCF Questions (Basic to High Level)

Basic Level

31. Find the LCM of 4 and 6.

32. Find the HCF of 12 and 18.

33. Find the LCM of 8, 10, and 12.

34. Find the HCF of 20 and 35.

35. Find the LCM and HCF of 14 and 21.

Intermediate Level

36. Find the HCF of 48, 60, and 72.

37. Find the LCM of 15, 20, and 30.

38. Two numbers are 36 and 84. Find their LCM and HCF.

39. Find the LCM of 24, 40, and 90.

40. The HCF of two numbers is 9, and their LCM is 180. If one number is 45, find the other.

High Level (Competitive / Assam SI)

41. The product of two numbers is 864. Their HCF is 12. Find their LCM.

42. Find the least number which, when divided by 12, 15, 18, and 20, leaves a remainder of 5.

43. The LCM of two numbers is 840 and their HCF is 14. If one number is 56, find the other.

44. Three numbers have HCF 6 and LCM 180. If two numbers are 18 and 30, find the third.

45. Find the smallest number exactly divisible by 8, 9, 12, 15, and 20.

46. The difference between two numbers is 36 and their HCF is 12. Find possible pairs.

47. A number divided by 14, 18, and 22 leaves the same remainder. Find the smallest such number.

48. The HCF of two numbers is 17 and their LCM is 714. If one number is 119, find the other.

49. The LCM of three numbers is 840. Two numbers are 24 and 35. Find the smallest third number.

50. Find the largest number that divides 105, 165, and 255 leaving the same remainder.

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