SEBA Class 10 Hindi Chapter 18 अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल प्रश्न और उत्तर Arunima Sinha: Sahas Ki Misaal – Ambar Bhag 2 Solutions | Assam Eduverse
Chapter Overview:
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SEBA / ASSEB Class 10 Hindi – Chapter 18 अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल Complete Solutions, Summary & Question Answers | Arunima Sinha Solutions
बोध एवं विचार
प्रश्न 1: सही विकल्प का चयन कीजिए –
(क) रेल-दुर्घटना में अरुणिमा घायल हुई थी –
(i) 11 जुलाई, 2011 को (ii) 11 अप्रैल, 2011 को (iii) 15 अप्रैल, 2011 को (iv) 20 अगस्त, 2011 को
उत्तर: (ii) 11 अप्रैल, 2011 को
(ख) रेल-दुर्घटना में घायल अरुणिमा का इलाज पहले हुआ था –
(i) बरेली के अस्पताल में (ii) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में (iii) लखनऊ के अस्पताल में (iv) उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान में
उत्तर: (i) बरेली के अस्पताल में
(ग) अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी पड़ी अरुणिमा –
(i) रेल में सफर करने के कारण पछताने लगी। (ii) घरवालों की याद करके रोने लगी। (iii) दिन-रात अपने दुर्भाग्य पर रोने लगी। (iv) हिमालय के शिखरों पर चढ़ने का सपना देखने लगी।
उत्तर: (iv) हिमालय के शिखरों पर चढ़ने का सपना देखने लगी।
(घ) चार महीनों के बाद जब अरुणिमा अस्पताल से निकली तो-
(i) सीधे बछेन्द्री पाल के पास पहुँच गई। (ii) सीधे टेनजिंग नरगे के पास पहुंच गई। (iii) सीधे माँ से मिलने घर पहुँच गई। (iv) सीधे पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने चली गई।
उत्तर: (iv) सीधे पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने चली गई।
(ङ) अरुणिमा एवरेस्ट के शिखर पर पहुँची –
(i) 21 मई, 2013 को। (ii) 31 मई, 2013 को। (iii) 21 जून, 2013 को। (iv) 21 मई, 2015 को।
उत्तर: (i) 21 मई, 2013 को।
प्रश्न 2. उपयुक्त शब्दों का चयन करके वाक्यों को फिर से लिखिए:
(क): अरुणिमा सिन्हा ……………………. को कुछ भी देने से इनकार कर रही थी।
उत्तर: अरुणिमा सिन्हा लुटेरों को कुछ भी देने से इनकार कर रही थी।
(ख): अरुणिमा लगभग ……………………. रेल की पटरियों के पास पड़ी रही।
उत्तर: अरुणिमा लगभग सात घंटे रेल की पटरियों के पास पड़ी रही।
(ग): अरुणिमा लद्दाख में स्थित माउंट शमशेर कांगरी की ……………………. फीट की ऊंचाई तक चढ़ने में सफल हुई।
उत्तर: अरुणिमा लद्दाख में स्थित माउंट शमशेर कांगरी की 21,103 फीट की ऊंचाई तक चढ़ने में सफल हुई।
(घ): काठमांडु से यात्रा आरंभ करने के 52 दिनों के बाद अरुणिमा ……………………. ऊंचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के शिखर पर आरोहण किया।
उत्तर: काठमांडु से यात्रा आरंभ करने के 52 दिनों के बाद अरुणिमा 8848 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के शिखर पर आरोहण किया।
(ङ): भारत सरकार ने अरुणिमा को सन् 2015 में ……………………. सम्मानित किया।
उत्तर: भारत सरकार ने अरुणिमा को सन् 2015 में “पद्मश्री” सम्मान से सम्मानित किया।
प्रश्न 3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए:
(क): किस खेल में अरुणिमा सिन्हा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य की टीम में खेलकर काफी नाम कमाया था?
उत्तर: अरुणिमा सिन्हा ने वॉलीबॉल के खेल में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य की टीम में खेलकर काफी नाम कमाया था।
(ख): चलती रेलगाड़ी में लुटेरे अरुणिमा से क्या मांगते हुए धमकी दे रहे थे?
उत्तर: चलती रेलगाड़ी में लुटेरे अरुणिमा से उसके गले का हार मांगते हुए धमकी दे रहे थे और कहते थे कि यदि वह हार नहीं देगी तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।
(ग): अरुणिमा ने किसकी देखरेख में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया था?
उत्तर: अरुणिमा ने एवरेस्ट विजय करने वाली बछेंद्री पाल की देखरेख में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया था।
(घ): डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से अरुणिमा को कौन-सा पुरस्कार मिला था?
उत्तर:: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से अरुणिमा को “अमेजिंग इंडियन अवार्ड” मिला था।
(ङ): अरुणिमा की तरह शारीरिक रूप से अक्षम अन्य एक विरल व्यक्तित्व का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: अरुणिमा की तरह शारीरिक रूप से अक्षम अन्य विरल व्यक्तित्व का उदाहरण स्टीफन हॉकिंग है, जो एक महान वैज्ञानिक थे और शारीरिक अक्षमता के बावजूद विज्ञान के क्षेत्र में अद्भुत योगदान दिया।
प्रश्न 4. संक्षिप्त उत्तर दीजिए (लगभग 25 शब्दों में):
(क): अरुणिमा की रेल-दुर्घटना के बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: 11 अप्रैल 2011 को लखनऊ से दिल्ली जाते समय लुटेरों ने अरुणिमा को चलती ट्रेन से फेंक दिया। दूसरी ट्रेन से टकराने के कारण उसका एक पैर कट गया।
(ख): रेल-दुर्घटना के बाद अरुणिमा के संबंध में किस तरह की अफवाहें फैली थीं?
उत्तर: लोग कहते थे कि अरुणिमा बिना टिकट यात्रा कर रही थी या आत्महत्या करने के लिए ट्रेन से कूद पड़ी थी। ये सभी अफवाहें गलत थीं।
(ग): अस्पताल में रहते समय अरुणिमा के मन में कैसे ख्याल आए थे?
उत्तर: अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी-पड़ी अरुणिमा हिमालय के शिखरों पर चढ़ने का सपना देखने लगी। उसके मन में एवरेस्ट विजय की तीव्र इच्छा जागी।
(घ): पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा को प्रेरणा और प्रशिक्षण किसने और कैसे दिया?
उत्तर: एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल ने अरुणिमा को प्रेरणा दी। टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के प्रशिक्षण कैंप में बछेंद्री पाल की देखरेख में उसका प्रशिक्षण हुआ।
(ङ): विकलांग होने पर भी अरुणिमा एवरेस्ट विजय प्राप्त करने में सफल हुई, क्यों?
उत्तर: अरुणिमा के मन में दृढ़ संकल्प, अदम्य साहस और प्रबल आत्मविश्वास था। उसने अपनी शारीरिक विकलांगता को चुनौती मानकर कड़े परिश्रम से सफलता पाई।
प्रश्न 5. आशय स्पष्ट कीजिए (लगभग 50 शब्दों में):
(क): परंतु इस अभियान की विफलता के कारण निराशा के स्थान पर अरुणिमा का संकल्प और भी दृढ़ हो गया।
उत्तर: माउंट शमशेर कांगरी के शिखर तक नहीं पहुंच पाने की विफलता ने अरुणिमा को तोड़ा नहीं बल्कि और मजबूत बनाया। उसका एवरेस्ट विजय का सपना और भी प्रबल हो गया और उसने निरंतर अभ्यास जारी रखा।
(ख): इस प्रकार अनेक व्यक्ति अपनी प्रतिभा के कारण विभिन्न परिवेश में राष्ट्रीय पटल पर सितारों के समान चमकते हुए सहस्र जनों के लिए आशा और प्रेरणा के स्रोत बन जाते हैं।
उत्तर: कुछ व्यक्ति अपनी विशेष योग्यता और कड़े परिश्रम से राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध होते हैं। वे हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं और निराश लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं।
प्रश्न 6.सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
(क): परंतु अरुणिमा ने इन सबको एक चुनौती मानकर एक नई जिंदगी जीने के लिए मन ही मन संकल्प कर लिया था।
उत्तर:
प्रसंग: यह वाक्य “अरुणिमा सिन्हा – साहस की मिसाल” पाठ से लिया गया है।
संदर्भ: रेल दुर्घटना के बाद अरुणिमा को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैली थीं। लोग कह रहे थे कि वह बिना टिकट यात्रा कर रही थी या आत्महत्या करने का प्रयास कर रही थी।
व्याख्या: अरुणिमा ने इन सब नकारात्मक बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उसने इन्हें एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और दृढ़ संकल्प लिया कि वह अपनी नई जिंदगी को साहस और हिम्मत के साथ जिएगी। अपनी शारीरिक विकलांगता को भी उसने हार नहीं माना और जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प किया।
(ख): युवराज से अरुणिमा को प्रेरणा मिली थी कि जो अपने हौसले और आत्मविश्वास कायम रख सके उसके लिए शारीरिक विकलांगता कोई लक्ष्य-प्राप्ति के मार्ग में प्राचीर बनकर खड़ी नहीं हो सकती और न जीवन में आगे बढ़ने में भी कोई बाधा बन सकती है।
उत्तर:
प्रसंग: यह वाक्य अरुणिमा की जीवनी से लिया गया है, जहाँ क्रिकेटर युवराज सिंह की प्रेरणा का उल्लेख किया गया है।
संदर्भ: युवराज सिंह ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़कर न केवल जीवन जीता बल्कि क्रिकेट में भी वापसी की और सफलता पाई।
व्याख्या: युवराज सिंह से अरुणिमा को यह शिक्षा मिली कि कठिनाइयों से हार मानने के बजाय साहस और आत्मविश्वास के सहारे उन्हें पार किया जा सकता है। यदि व्यक्ति का मनोबल दृढ़ हो तो शारीरिक विकलांगता कभी लक्ष्य प्राप्ति में रुकावट नहीं डाल सकती। अरुणिमा ने युवराज के संघर्ष से प्रेरणा लेकर जीवन की राह में आगे बढ़ने का निश्चय किया।
प्रश्न 7. सम्यक् उत्तर दीजिए:
(क): अरुणिमा सिन्हा के जीवन में जो विपत्ति आई उसकी चुनौती उसने किस प्रकार ग्रहण की?
उत्तर: अरुणिमा के जीवन में रेल-दुर्घटना जैसी भीषण विपत्ति आई, जिसमें उसका एक पैर काटना पड़ा। लेकिन उसने इस दुर्भाग्य को कमजोरी न मानकर एक नई शुरुआत का अवसर समझा। चारों ओर से उठ रही अफवाहों और नकारात्मक बातों को अनसुना कर उसने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। अस्पताल में पड़े-पड़े ही उसने एवरेस्ट पर चढ़ने का सपना देखा। कृत्रिम पैर लगाकर भी हार न मानते हुए वह निरंतर अभ्यास करती रही और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही। इस प्रकार अरुणिमा ने विपत्ति को चुनौती बनाकर अपने जीवन को नई दिशा दी।
(ख): माउंट शमशेर कांगरी के शिखर पर पहुंच न सकने के दुःख को अरुणिमा ने किस प्रकार ग्रहण किया?
उत्तर: जब अरुणिमा शमशेर कांगरी पर्वतारोहण अभियान में खराब मौसम के कारण शिखर तक नहीं पहुंच सकी, तब भी उसने इसे असफलता न मानकर अपनी क्षमता का प्रमाण माना। 21,103 फीट की ऊँचाई तक पहुँचना उसके आत्मविश्वास को और बढ़ाने वाला अनुभव बना। उसने इस घटना को अस्थायी विफलता मानकर उससे प्रेरणा प्राप्त की और और भी कड़ी मेहनत शुरू कर दी। यही अनुभव आगे चलकर उसके लिए एवरेस्ट विजय की प्रेरणा बन गया।
(ग): अरुणिमा ने अपने जीवन के दुर्भाग्य को कैसे सौभाग्य में बदल दिया?
उत्तर: अरुणिमा ने अपने जीवन के दुर्भाग्य को अपनी मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक दृष्टिकोण से सौभाग्य में बदल दिया। उसने नकारात्मक परिस्थितियों को चुनौती मानकर एवरेस्ट विजय का स्पष्ट लक्ष्य रखा और उसके लिए कठोर परिश्रम किया। बछेंद्री पाल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेकर उसने अपनी शारीरिक कमजोरी को मात दी। कृत्रिम पैर के साथ कठिन अभ्यास करके उसने अपनी अक्षमता को अपनी ताकत बना लिया। इस तरह अरुणिमा न केवल स्वयं सफल हुई, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई।
(घ): पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा की उपलब्धि क्या है – अपने शब्दों में वर्णन करें।
उत्तर: अरुणिमा सिन्हा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने वाली विश्व की पहली महिला बनी। 21 मई 2013 को उन्होंने 8,848 मीटर की ऊँचाई पर तिरंगा फहराकर भारत का नाम रोशन किया। इससे पहले उन्होंने शमशेर कांगरी की 21,103 फीट ऊँचाई तक सफल चढ़ाई की थी। उनके इस साहस ने विकलांग व्यक्तियों के लिए एक नई मिसाल कायम की। उन्हें पद्मश्री और तेनजिंग नॉर्गे पुरस्कार जैसे सम्मान भी मिले। उनकी उपलब्धियाँ दर्शाती हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
(ङ): “अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर ऐसे कामों के लिए आगे बढ़ने के सिवाय एक सामान्य जीवन जीना ही तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा।” लोग अरुणिमा को ऐसा परामर्श क्यों देते थे?
उत्तर: लोग अरुणिमा को यह परामर्श उसकी शारीरिक चुनौतियों और पर्वतारोहण के खतरों को देखते हुए देते थे। उसका एक पैर कृत्रिम था और दूसरा भी कमजोर हो चुका था, जिससे लोगों को लगता था कि वह इस जोखिम भरे कार्य को नहीं कर पाएगी। पर्वतारोहण में जान का खतरा, ऑक्सीजन की कमी और दुर्घटना की संभावना अधिक होती है, इसलिए लोग उसकी सुरक्षा की चिंता करते थे। परंपरागत सोच के कारण भी विकलांग व्यक्ति को ऐसे कार्यों के योग्य नहीं माना जाता। लेकिन अरुणिमा ने सबकी आशंकाओं को गलत साबित करते हुए अपने साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति से एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की।
भाषा एवं व्याकरण
1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए:
उत्तर:
- रेलगाड़ी – रेलगाड़ियां
- लुटेरा – लुटेरे
- पटरी – पटरियां
- पहिया – पहिए
- जरूरत – जरूरतें
- बाधा – बाधाएं
- सितारा – सितारे
- सफलता – सफलताएं
2. निम्नलिखित उर्दू के उपसर्गों से दो-दो शब्द बनाइए:
उत्तर:
- ब: बनावट, बगावत
- ला: लाजवाब, लापरवाह
- हम: हमसफर, हमदर्द
- गैर: गैरकानूनी, गैरहाजिर
- हर: हरदम, हरवक्त
- खुश: खुशहाल, खुशकिस्मत
- बद: बदनाम, बदकिस्मत
- ता: ताजिंदगी, ताकत
3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए:
उत्तर:
- लड़की – लड़का
- अंधेरा – उजाला
- दायां – बायां
- दुखमय – सुखमय
- अक्षम – सक्षम
- सुफल – असफल
4. पठित पाठ में कई मुहावरों का प्रयोग हुआ है। इन्हें छांटिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिए:
उत्तर:
- सिर झुकाना (हार मानना)
- वाक्य: अरुणिमा ने कभी परिस्थितियों के सामने सिर नहीं झुकाया।
- आंखों का इशारा (संकेत देना)
- वाक्य: अध्यापक ने आंखों के इशारे से छात्रों को चुप रहने को कहा।
- हौसला बुलंद रखना (साहस बनाए रखना)
- वाक्य: मुश्किल समय में हौसला बुलंद रखना जरूरी है।
- जान का खतरा (जीवन को जोखिम में डालना)
- वाक्य: पर्वतारोहण में जान का खतरा होता है।
- मन ही मन (दिल में)
- वाक्य: उसने मन ही मन प्रतिज्ञा की कि वह सफल होगा।
योग्यता-विस्तार
- अनुकरणीय व्यक्तित्व:
- अरुणिमा सिन्हा की तरह के अन्य प्रेरणादायक व्यक्तित्व:
- हेलेन केलर (Helen Keller)
- चुनौती: अंधी और बहरी होने के बावजूद
- उपलब्धि: पहली अंधी-बहरी महिला जिसने स्नातक की डिग्री प्राप्त की
- योगदान: लेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता, वक्ता
- सुधा चंद्रन
- चुनौती: कार दुर्घटना में पैर खोने के बाद
- उपलब्धि: प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना
- योगदान: कृत्रिम पैर के साथ नृत्य में उत्कृष्टता
- एपीजे अब्दुल कलाम
- चुनौती: गरीबी और साधन की कमी
- उपलब्धि: भारत के राष्ट्रपति, मिसाइल मैन
- योगदान: वैज्ञानिक अनुसंधान और युवाओं की प्रेरणा
- स्टीफन हॉकिंग
- चुनौती: मोटर न्यूरॉन रोग से ग्रस्त
- उपलब्धि: विश्वप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी
- योगदान: ब्लैक होल और कॉस्मोलॉजी में अनुसंधान
- मुकेश अंबानी
- चुनौती: व्यावसायिक संघर्ष
- उपलब्धि: भारत के सबसे अमीर उद्योगपति
- योगदान: रिलायंस इंडस्ट्रीज का विकास
- सबक: इन सभी व्यक्तित्वों से यह सीख मिलती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सकारात्मक दृष्टिकोण से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। चुनौतियां हमें कमजोर नहीं बल्कि मजबूत बनाती हैं।
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